October 19, 2017

खादी वस्त्र नही विचार ओर भारतीय संस्कृति का आधार

आज हम भारत देश को “आधुनिक भारत” बनाने की पुरजोर कोशिश कर रहे है, ओर हमारी युवा पीढी इस मुहिम मे बढ चढकर हिस्सा ले रही है  वह आज हर काम मे सबसे आगे रहना चाहती है फिर वह चाहे पढाई से लेकर सोशल नेटवर्किंग साइट्स के जरिए दुनिया से जुड़े रहने की बात ही क्यो न हो  ,हम आज सब कुछ ब्रांडेड पहनना चाहते है फिर वह चाहे हमारे हाथ की घड़ी से लेकर, हमारे कपड़े ओर हमारे जूते तक ही क्यू न हो ! आज हमारी मानसिकता ऐसी हो गई है कि अगर मेरे पास ब्रांडेड चीजे नही होगी तो यह समाज मुझे स्वीकार नही करेगा तो क्या अब से लगभग 50 वर्ष पहले जब लोग खादी पहना करते थे तो क्या उन्हे समाज मे सम्मान नही मिला।लाल बहादुर शास्त्री जी, महात्मा गांधी जी,जवाहर लाल नेहरू जी यह वो शख्सियत है जिन्होंने खादी पहना ही नही अपितु खादी को अपने जीवन मे ढाला ओर देश को आजाद कराने के लिए संघर्ष की वह इबादत लिख ड़ाली जिसकी आज मै ओर आप केवल कल्पना ही कर सकते है।

परन्तु आज  पश्चिमी संस्कृति हमारे ऊपर इस कदर हावी हो चुकी है कि हम धीरे-धीरे अपनी भारतीय संस्कृति को भी भूलते जा रहे है ! डिस्को, पब, शराब, सिगरेट आदि पीना जीवन शैली के अंग बन गये है।पश्चिमी संस्कृति का ही दुष्परिणाम है कि  देश मे आत्महत्या ओर तलाक लेने वाले दंपतियो की संख्या मे इजाफा हुआ है।परन्तु यहा यह कहना शायद गलत होगा कि इसमे सारा दोष पश्चिमी सभ्यता का है

आज जिस स्थिति मे हम है उसके काफी हद तक हम स्वयं ही जिम्मेदार है, आज हमारे बच्चो को फिल्मो के हीरो हीरोइन के नाम तो मालूम है परन्तु अगर आप उनसे यह पूछेंगे कि हमारे देश के राष्ट्रपिता कौन थे तो शायद वह ना बता पाए परन्तु  इसमे बच्चो से ज्यादा उनके अभिभावको  की गलती है बच्चा तो वही सीखेगा जो हम उसे सीखाएगे, उसे रामायण की जगह ड़ोरेमन जैसे चरित्र दिखाएंगे तो उसका परिणाम क्या होगा वह मुझसे बेहतर आप जानते है।गाँधी जी ने अपने संघर्ष के दिनो मे  कुछ ऐसी  अनमोल वस्तुऐ भारत देश को दी जिनका मूल्य लगाना मुश्किल ही नही नामुमकिन है, वैसे तो इतिहास मे कई चीजो का उल्लेख आता है ,परन्तु इसमें चरखा ओर खादी का अपना एक  विशेष महत्व है ।

भारत में चरखे का इतिहास बहुत प्राचीन होते हुए भी इसमें उल्लेखनीय सुधार का काम महात्मा गांधी जी के जीवनकाल मे ही माना जाना चाहिए।सन्‌ 1916 में साबरमती आश्रम  की स्थापना हुई थी। बड़े प्रयत्न से दो वर्ष बाद सन्‌ 1918 में एक विधवा बहन के पास खड़ा चरखा मिला था।  भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन में खादी का भी विशेष  महत्व रहा।गांधी जी ने 1920 के दशक में गावों को आत्म निर्भर बनाने के लिये खादी के प्रचार-प्रसार पर बहुत जोर दिया था।

आज ‘खादी’ गांधीजी के नाम से जानी जाती है, लेकिन वैदिक काल से ही ‘खादी’भारतीय सभ्यता की जड़ों में समाहित थी। कपास की खेती, सूत की कताई और बुनाई ये तीनों चीजें विश्व-सभ्यता को भारत की देन हैं। दुनिया में सबसे पहले भारत में ‘सूत’ काता गया और कपड़ा बुना गया! सूत कातना और कपड़ा बुनना यहां का उतना ही प्राचीन उद्योग है, जितना कि स्वयं हिंदुस्तान की सभ्यता।मेरे विचार में खादी हिंदुस्तान की समस्त जनता की एकता , उसकी आर्थिक स्वतंत्रता की प्रतीक है और इसलिए जवाहरलाल नेहरू जी ने कहा था कि ‘खादी हिंदुस्तान की आजादी की पोशाक है’।इसी बीच अप्रैल 1957 मे  खादी ओर ग्रामोद्योग आयोग स्थापित हुआ जिसका  मुख्य कार्य ग्रामीण विकास में लगे अन्य अभिकरणों से समन्वय स्थापित कर ग्रामीण क्षेत्रों में खादी और अन्य ग्रामोद्योग के विकास के लिए कार्य करना है।इसमे खादी और ग्रामोद्योग में लगे कारीगरों के लिए प्रशिक्षण का आयोजन भी किया जाता है।

हम जानते हैं कि अगर इंसान की इच्छा शक्ति प्रबल हो तो वह इतिहास की गति को भी मोड़ लेता है. गांधी जी ने पुराने चरखे से मैनचेस्टर की सबसे आधुनिक मिलों को पीट दिया था.हालांकि गांधी जी  ने आठ दिसंबर, 1921 को यंग इंडिया में अपने लेख में लिखा था- ‘चरखा व्यापारिक युद्ध की नहीं, बल्कि व्यापारिक शांति की निशानी है.’ और गांधी जी  ने खुद तो खादी पहना ही, लगभग पूरे देश को खादी पहना दिया था, खादी पहनने को शान की चीज़ बना दिया. पर खादी महज कपड़े भर का नाम नहीं है. गांधी जी ने इसे जीने के तरीक़े और सादगी से जोड़ा.

और यह बात स्थापित हो गई कि खादी पहनकर दुराचार करना या शराब पीना पाप है  और शायद तभी कहा भी गया कि “खादी वस्त्र नहीं विचार है”. ये और बात है कि खादी पहनने वालों ने आज़ादी के बाद खादी पहनकर हर तरह के बुरे कार्य किए, ओर आज उसी का परिणाम है कि सोने की चिड़िया कहा जाने वाला भारत  प्रगतिशील देशो की सूची मे खड़ा हैै।ऐसा क्यो हुआ कि महात्मा गांधी जी को अपनी जागीर समझने वाली कांग्रेस  सरकार अपने राज मे खादी की उपेक्षा ही करती रही ओर वही दूसरी ओर जब मोदी सरकार ने इसके विकास के लिए कार्य करने शुरू किए तो मोदी जी की चरखे के साथ छपी तस्वीर का बेवजह तूल बनाकर राजनीति करनी शुरू कर दी

आज मोदी सरकार ने यह घोषणा की है कि पाच करोड़ लोगो को खादी के द्वारा रोजगार मुहैया कराया जाएगा खादी का उत्पादन बढ़ने और उसकी बिक्री बढ़ने जैसी मोदी सरकार की उपलब्धि से कांग्रेस में घबराहट तो पिछले कई महीनों से महसूस हो रही थी!

कांग्रेस के सत्ता में रहते हुए कभी खादी और चरखा को देश में ही लोकप्रिय बनाने की कांग्रेस की कोई कोशिश किसी को याद नहीं। इसके विपरीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा विश्व पटल पर खादी की चर्चा की और उसे एक ब्रांड के तौर पर स्थापित किया। एयर इंडिया के स्टाफ को खादी के वस्त्र पहनने की अनिवार्यता मोदी सरकार की उसी रणनीति का हिस्सा है जो खादी को बाहर के मुल्कों में स्थापित करने को लेकर बनाई गई है। मोदी सरकार की तरफ से खादी उधोग को बढ़ावा देने के लिए साल 2015 मे 341 करोड़ रूपए मंजूर किए गए, यह सरकार के अथक प्रयासो का नतीजा है कि दिल्ली कनाट प्लेस पर खादी ग्रामोद्योग  के स्टोर पर एक दिन मे एक करोड़ के करीब बिक्री दर्ज हुई जो अपने आप मे एक रिकार्ड है, यह निश्चित तौर पर मोदी जी की खादी को लेकर एक ठोस सोच को दर्शाता है जो कांग्रेस के गले शायद ही उतरेगा।

Picture Credit: khadiindia.net

Author: @sameerch123


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