March 24, 2017

खान अब्दुल गफ्फार खान

ये है खान अब्दुल गफ्फार खान ।सीमान्त गांधी ।लाल कुर्तिवाले ।

बलूच बटवारे से दुखी थे ।

वे भारत के साथ रहना चाहते थे ,लेकिन भूगोल ने उन्हें मारा ।बापूके सच्चे अनुयायी सीमान्त जब आख़िरी बार मिले तो बापू ने खान से कहा – अब भारत का मोह त्याग दो ,अपने देश की सेवा करो ।

यह अंदाजा लगाना आसान नहीं है कि क्या गुजरा होगा दोनों के दिल में । वही सीमान्त गांधी पाकिस्तान में ता उम्र कैद रहे । 69 में भारत की प्रधान मंत्री श्रीमती इंदिरागांधी के विशेष आग्रह पर इलाज के लिए भारत आये।

हवाई अड्डे पर उन्हें लेने श्रीमती गांधी और जे पी गए । खान जब हवाई जहाज से बाहर आये तो उनके हाथ में एक गठरी थी जिसमे उनका कुर्ता पजामा था ।

मिलते ही श्रीमती गांधी ने हाथ बढ़ाया उनकी गठरी की तरफ -इसे हमे दीजिये ,हम ले चलते हैं । खान साहब ठहरे,बड़े ठंढे मन से बोले -यही तो बचा है ,इसे भी ले लोगी ?

बटवारे का पूरा दर्द खान साब की इस बात से बाहर आ गया । जे पी और श्रीमती गांधी दोनों ने सिर झुका लिया ।

जे पी अपने को संभाल नहीं पाये ,उनकी आँख से आंसू गिर रहे थे ।


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