May 27, 2017

घर मे बुजुर्ग: अभिशाप या आशीर्वाद

आज हमारा हिन्दुस्तान एक न्यू इंडिया बनने की ओर अग्रसर है रोज देश मे कोई नया कानून पारित होता है अभी वीआईपी कल्चर खत्म करके केंद्र सरकार द्वारा देश मे सबको एक समान करने की अच्छी पहल हुई है, हम आज चांद तक भी जा पहुचे है, परन्तु यहा पर विचार करने वाली बात यह है कि जहा से हम चले है वह जड़े हमारी मजबूत है कहते है अगर किसी वृक्ष की जड़े मजबूत न हो तो वह ज्यादा दिन नही टिकता इसी प्रकार यदि हमारी भी जड़े मजबूत नही है तो हम एक कमजोर वृक्ष के समान है अब यहा एक बात पर गौर करना जरूरी है कि हमारी जड़े क्या है?

हमारी जड़े है हमारे बुजुर्ग यानी हमारे मां बाप जिन्हे हमने अब एक पुराना सामान समझ कर छोड़ दिया क्योंकि पश्चिमी संस्कृति हमारे ऊपर हावी हो चुकी है हमारे माता-पिता हमे अच्छी परवरिश देने के लिए दुनिया की सारी खुशी हमारे कदमो मे ड़ाल देते है और जिस समय उन्हे हमारी सबसे ज्यादा जरूरत होती है तब हम उन्हे वृद्ध आश्रम मे छोड आते है।

देश मे आज वृद्ध आश्रम भरे पड़े है ओर हम नया भारत बनाने की बात करते है वृद्ध आश्रम मे माता पिता की आखे यही इंतजार करती है कब उनका बेटा उन्हे लेने आएगा मै आप लोगो से पूछता हू क्या हम आज अपने स्वार्थ मे इतना अंधे हो गए कि हमे अपने माता-पिता की आख के आसू नही दिखाई पड़ते।

” वाह री दुनिया के दस्तूर एक मां बाप चार बच्चो को पाल सकता है परन्तु चार बच्चो से एक मा बाप नही पाले जाते “

देश मे जिस दिन सारे वृद्ध आश्रम खाली हो जाएगे उस दिन मे समझूंगा कि हम नया भारत बनाने मे कामयाब हुए

Picture Credit: PTI via DNA


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