November 23, 2017

“जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि “

हममे से शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जिसे जीवन में कोई न कोई समस्या न हो सच तो ये है की हम सारी उम्र ही समस्याओ से घिरे रहते है, कभी कभी तो जीवन ही समस्या और दुखो का घर लगने लगता है। जैसे ही एक समस्या का निपटारा होता है तो महसूस होता है कि अब जीवन समस्यारहित हो गया है।लेकिन इसी बीच हम किसी न किसी नई समस्या से घिर जाते है। आखिर कब होगा इन समस्याओ का अंत? हम जीवन भर इसी प्रश्न का उत्तर ढूंढते रहते है। लेकिन उत्तर मिलने की जगह हमारे सामने ओर समस्याए खड़ी हो जाती है।

आइए इस प्रश्न का उत्तर एक घटना घटना से समझने का प्रयत्न करे-

एक बार एक व्यक्ति बहुत परेशान व उदास था। वह जीवन की रोजमर्रा की समस्याओ से ऊब चुका था। थक हारकर वह एक दिन एक साइकॉलजिस्ट के पास पहुँचा ओर अपनी सारी व्यथा सुनाई- मेरी पत्नी का स्वास्थ्य ठीक नही रहता, पिताजी को हृदय रोग है, लड़का कहना नही मानता, पड़ोसी से झगड़ा रहता है आदि। कृपया आप मेरी समस्याओ का हल बताए।

मनोवैज्ञानिक ने उस व्यक्ति की बात को बहुत धैर्यपूर्वक सुना ओर अगले दिन दो बजे आने को कहा। वह व्यक्ति अगले दिन तय समयानुसार पहुँच गया। तत्पश्चात, उस व्यक्ति को अपनी कार मे बिठाकर वह साइकॉलजिस्ट बोलें- कि चलो तुम्हे आज ऐसे इलाके मे लेकर चलता हू जहा ऐसे लोग रहते है जिन्हे कोई समस्या नही है। यह सुनकर वह व्यक्ति हैरानी ओर उत्सुकता से भर गया।

शहर से कुछ दूर बाहर आकर एक स्थान पर कार रूकी ओर वह बोले- “चलो आ गया समस्याविहीन वयक्तियो के रहने का इलाका”। वह व्यक्ति उतरा ओर उसने देखा कि उस इलाके के बाहर दरवाजे पर लिखा था -“कब्रिस्तान” ।

मनोवैज्ञानिक ने बात को स्पष्ट करते हुए कहा कि यही वह स्थान है जहा पर लोगो को कोई समस्या नही है। रहोगे यहा पर? जब तक जीवन है तब तक समस्याए रहेगी। जरूरत है उनसे मुकाबला करने की न कि उनसे भागने की। उस व्यक्ति को तो मानो जीवन जीने का नया ठोस आधार ही मिल गया।

जीवन समस्याओ से हार मानने का नही लड़ने का नाम है।हमारे सामने हजार वजह है समस्याओ के सामने हार मानने की।लेकिन कोई एक वजह तो होगी जिसकी वजह से हम लड़ सकते है परिस्थितियो का ड़टकर मुकाबला कर सकते है।बस हमे उसी एक वजह को तलाश करना है।क्योकि कहते है “जीत हटने से नही ड़टने से मिलती है”

तो आज से फैसला करे परिस्थितियों से भागेगे नही, उनका ड़टकर मुकाबला करेगे। क्योकि एक गुमनाम शायर ने कहा है कि –

“हालात के कदमो पे कभी सिकन्दर नही गिरता , टूटे भी अगर तारा तो जमी पर नही गिरता

बड़े शौक से गिरती है लहरे समन्दर मे, मगर समन्दर कभी लहरो मे नही गिरता”।

तो जीवन मे समन्दर बनने का प्रयास करे लहरे नही।।

Picture Credit: Rishabh”s Lens


Disclaimer 

About Sameer Chaudhary 12 Articles
MBA in HR. I worked for 3 yrs in financial Industry and finally decided to follow my dream which is writing. My passion is writing, exploring the world and to get different experiences by meeting people. My philosophy about life is that " You are the only master of life. So you decide what you want to do don't compel other to decide." Life is to live.....