January 24, 2018

तीन तलाक़ – एक क्रांतिकारी कानून

इस्लाम का उदय सातवीं सदी में अरब प्रायद्वीप में हुआ था। इसके अन्तिम नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का जन्म 570 इस्वी में मक्का में हुआ था। लगभग 613 इस्वी के आसपास मुहम्मद साहब ने लोगों को अपने ज्ञान का उपदेश  देना आरंभ किया था। इसी घटना को इस्लाम का आरंभ माना जाता है।लेकिन इस समय तक इसको एक नए धर्म के रूप में नहीं देखा गया था। परवर्ती वर्षों में मुहम्म्द साहब के अनुयायियों को मक्का के लोगों द्वारा विरोध तथा मुहम्म्द के मदीना प्रस्थान (जिसे हिजरा नाम से जाना जाता है) से ही इस्लाम को एक धार्मिक सम्प्रदाय माना गया।

अगले कुछ वर्षों में कई प्रबुद्ध लोग मुहम्मद स्० (पैगम्बर नाम से भी ज्ञात) के अनुयायी बने। उनके अनुयायियों के प्रभाव में आकर भी कई लोग मुसलमान बने। इसके बाद मुहम्मद साहब ने मक्का वापसी की और उसे बिना युद्ध के मक्काह फ़तह किया। इस घटना के बाद कई और लोग इस्लाम में परिवर्तित हुए। पर पयम्बर (या पैगम्बर मुहम्मद) को कई विरोधों का सामना करना पड़ा जिसका दमन कर उन्होंने जीत हासिल की।

उनकी वफात के बाद अरबों का साम्राज्य और जज़्बा बढ़ता ही गया। अरबों ने पहले मिस्र और उत्तरी अफ्रीका पर विजय हासिल की और फिर बैजेन्टाइन तथा फारसी साम्राज्यों को हराया। यूरोप में तो उन्हें विशेष सफलता नहीं मिली पर फारस में कुछ संघर्ष करने के बाद उन्हें जीत मिलने लगी। इसके बाद पूरब की दिशा में उनका साम्राज्य फेलता गया। सन् 1200 तक वे भारत तक पहुँच गए। अगले कई दिनों में मध्य एशिया, भारतीय प्रायद्वीप और मलेशिया तक उन्हें विजय मिली।

हालांकि मुसलमानों का इतिहास सातवी सदी में आ गया था।लेकिन इकीसवीं सदी तक इस्लाम धर्म की महिलाओं को आज भी रहने से लेकर खाने और पहनने तक कि आजादी नही है।जैसे ही धर्म में कोई नया काम करता है तुरंत उसके नाम फतवा जारी हो जाता है।ऐसा क्यों है इस धर्म की महिलाओं के साथ?ऐसा लगता है जैसे पूरे धर्म को चलाने का ठेका कुछ दो चार मौलवियों ने ही लिया हुआ है।हर धर्म में अपने कायदे कानून है लेकिन जितने सख्त कायदे कानून इस धर्म में है इतने किसी में नहीं।आये दिन महिलाओं को किसी न किसी  फतवे के द्वारा प्रताड़ित किया जाता है। ऐसे ही एक तीन तलाक़ की बीमारी से महिलाएं काफी समय से पीड़ित थी। लेकिन सदियों से चली आ रही इस दकियानूसी परंपरा के खिलाफ ऐतिहासिक कानून बनाया जा चुका है। तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट के कहे मुताबिक सरकार तीन तलाक पर कानून बना कर लोकसभा में पेश कर चुकी है।और वहां इस बिल को मंजूरी भी दे दी गयी है।लेकिन अब सरकार की असली परीक्षा राज्यसभा में होगी।और अगर राज्यसभा में इस बिल को मंजूरी मिल गयी तो मोदी सरकार के लिए इसे एक बड़ी सफलता के तौर पर देखा जाएगा।राज्यसभा में बिल पारित करने को लेकर कांग्रेस से बातचीत की जा रही हैं।हालांकि राजनीति में सब कुछ संभव है। यहां हालात रातों रात बदलते है। जो एक रात पहले तक दोस्त थे अगली सुबह वो दुश्मन बन जाते है। ऐसा ही कुछ नजारा हमे उस समय देखने को मिला जब 100 साल से भी पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस को 35 साल पुरानी पार्टी के सामने तीन तलाक़ कानून पर घुटने टेकते देखा गया।

क्या इसे हम कांग्रेस पार्टी का 2014 में 44 सीट पर खत्म हो जाने के बाद देश की राजनीति में उभरने की ओर पहला कदम समझा जाये ? और अब उसे भी पता है अगर उसे अपना अस्तित्व बचाना है तो दिल पर पत्थर रखकर ऐसे ही कुछ कड़े कदम उठाने होंगे।लेकिन कहीं न कहीं कांग्रेस को भी पता है कि उसकी जड़े तुच्छ राजनीति से पनपी है जिन्हें उखाड़ फेंकना इतना आसान नहीं होगा।और उसके द्वारा लिए गए कुछ गलत फैसलों ने आगामी राज्य के चुनावों और 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा का बोझ काफी हद तक कम कर दिया है।

ट्रिपल तलाक़ के मामले में कभी कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने जब भी महिला सशक्तिकरण की बात की उन्होंने कभी भी तीन तलाक़ के मुद्दे पर बात नहीं की।फिर रणदीप सुरजेवाला का ये बयान की वो पहले थे जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया था कहीं न कहीं बेमानी नजर आता है।और उसके बाद मोदी सरकार में शाह बानो की ओर से उठाया गया ये मुद्दा कभीं नहीं भुलाया जा सकता।पिछले 10 वर्षों में कांग्रेस कहां थी? यह सवाल उठना लाजमी है।लेकिन कहीं न कहीं मोदी जी को इसका श्रेय जाना चाहिए कि उन्होंने नोटबन्दी और जीएसटी के बाद तीन तलाक़ जैसे कानून को पास करने का खतरा मोल लिया।

हालांकि मोदी और अमित शाह बहुत ही मुखर हैं, पार्टी के अन्य नेताओं को अनुशासन बनाए रखने की जरूरत है और उन्हें शांत रहना चाहिए। क्योंकि उनकी एक गलत बयानबाजी पार्टी के लिए काफी मुश्किल खड़ी कर सकते है। राज्य सभा में विधेयक पारित होना अभी बाकी है।लेकिन मुसलमानों के बल पर राजनीति करने वाली कांग्रेस बिल के पक्ष में कम और विपक्ष में ज्यादा नजर आ रही है। लेकिन विरोधी दलों के विरोध के बीच बिल को लोकसभा और राज्यसभा से होते हुए मंजिल तक पहुंचना है ।

Picture Credit: Wikipedia

Disclaimer

About Sameer Chaudhary 14 Articles
MBA in HR. I worked for 3 yrs in financial Industry and finally decided to follow my dream which is writing. My passion is writing, exploring the world and to get different experiences by meeting people. My philosophy about life is that " You are the only master of life. So you decide what you want to do don't compel other to decide." Life is to live.....