April 28, 2017

“बाबू” शब्द की उत्पत्ति

“बाबू” शब्द की उत्पत्ति कब, कहां, कैसे और किसके द्वारा हुई इसपर भिन्न-भिन्न विचार हैं। अभी हाल में सरकारी अफसरों ने बाबू कहे जाने पर ऐतराज भी प्रकट किया।

बाबू, बाबूजी, बाबूसाहब बड़े सम्मान जनक शब्द लगते हैं। कई लोग अपने पिता को बड़े सम्मान से ‘बाबूजी’ कहकर पुकारते हैं। कुछ लोग अपने सामने वाले को बाबू साहब कहकर संबोधित करते हैं। यह सम्मान जनक बाबू शब्द हमारे देश में कहां से आया?

एक बात निश्चित है ये शब्द अंग्रेजों की उपज थी। अंग्रेज भारत आते वक्त रास्ते में अफ्रीका में रूके, यहां उन्होंने काले मुंह के एक विशेष जाति के बंदर ‘बाबूं’ (baboon) को देखा और जब वे भारत में आए तो उन्हें अपने राजकीय कारोबार तथा हिसाब-किताब का लेखा-जोखा रखने के लिए थोड़े बहुत पढ़े-लिखे क्लर्कों की जरूरत पड़ी। जिसे उन्होंने भारतीयों से पूरा किया। दफ्तर में अंग्रेज अक्सर भारतीयों को देखकर अफ्रीका में देखे (baboon)  से उनकी तुलना कर क्लर्कों की तरफ देखकर बाबूं कहते हुए उनकी हंसी उड़ाते थे और भारतीय क्लर्कों को वे बाबूं कहकर पुकारते थे।

दूसरी सोच ये है कि बाबू शब्द फारसी और हिन्दी का मिश्रण है। फारसी में “बा” यानी “साथ”, जैसे बाअदब यानी अदब के साथ, और हिन्दी में बू का अर्थ है गंध या बदबू। अंग्रेज मानते थे इन क्लर्कों से बदबू आती है इसलिये “बाबू” नाम दिया। भारतीय क्लर्क अंग्रेजों के द्वारा कहे गए शब्द को सम्मानजनक मान कर बड़े फख्र से कहते थे कि वे अंग्रेजी दफ्तर में बाबू हैं। अंग्रेज खुद को साहब और भारतीयों को बाबू कहलाना पसंद करते थे। बडा़ बाबू, किरानी बाबू, हाजिरी बाबू, छोटा बाबू सारे ओहदे अंग्रेजों की देन है।

इस प्रकार यह अंग्रेजों का (baboon) या बा-बू, बाबू बनकर भारत में घुस आया। जो आज भी चल रहा है।


Written by Ravi Saraogi Twitter @ravi_saraogi

Pic Credit: i4c.co.in

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