September 20, 2017

“बेटियां”

“है आज मुझे सुख भी दुःख भी

हम यहाँ रहे तुम वहा चली

बचपन के साथी छोड़ यहाँ जीवनसाथी के संग चली”

घर में शादी की खुशियां चारो तरफ उमंग और उल्लास भरा माहौल पता ही नहीं चला की कब बेटियां बड़ी हो गयी और उनका ससुराल जाने का समय नज़दीक आ गया या यू कहे की माँ बाप के जीवन से बहारो के जाने का समय। कभी हमने ये नहीं सोचा की अनजाने में बेटियां कितना सुख दे जाती है और वही दूसरी और बेटी की विदाई माँ बाप के जीवन का सबसे कठिन समय होता है ।एक और तो बिटियाँ को मनचाहा वर मिलने की खुशी और दूसरी और अपना सूना होता घर आँगन ।जिस आँगन में लाड़ली के पैरो की रुनझुन से सारा वातावरण संगीतमय हो जाता था वही आज किसी अनजान आँगन कि शोभा में चार चाँद लगाने जा रही है। वैसे एक दूसरे नजरिये से देखा जाये तो हमारी बेटियां कितनी सहजता से एक नया जीवन अपना लेती है।बिलकुल निर्मल जल की तरह जैसे जल अपने कोमल स्वभाव से धरती  को सिंचित करके उसे हरा भरा कर देता है उसी तरह बेटियां भी जिस घर में जाती है उससे खुशियों और बहारों से भर देती है।

वही दूसरी ओर आज  बेटी ससुराल जाने के बाद यह सोचती है की समय कितनी जल्दी बीत गया।लगता है अभी थोड़े दिन पहले ही तो मेरे माँ बाप ने अपना सब कुछ देकर मुझे विदा किया था उन्होंने अपने सारे सुख मेरे जीवन को सवारने में अर्पण कर दिए ।मुझे अच्छे संस्कार और शिक्षा दी क्यूंकि उन्हें मालूम था की एक
संस्कारित बेटी ही दो कुलो का उद्धार करती है ।इसलिए माता पिता की यही कोशिश रहती है की उनकी बेटी सर्वगुणसंम्पन हो इसलिए बेटी को जन्म से ही सुशिक्षित करते है और फिर अपने प्राणो से भी ज्यादा प्यारी बेटी को एक नए परिवेश में ख़ुशी खुशी विदा कर देते है माता पिता अपनी बेटी की विदाई पर बस ये ही कह पाते है की –

जुदा आज होता है टुकड़ा जिगर का, कि छिनता है अनमोल मोती ये घर का
लाड़ली तेरी  शादी की ये शुभ घडी है,पता आज चला है की कितनी कड़ी है

है जगदीश से यह प्रार्थना हमारी, सुहागिन रहे तू सदा हे दुलारी

प्यारी बेटी भी बस ये ही कह पाती है –
बचपन की भोली भूल विदा,सखियों का सुखमय प्यार विदा
जिसमे में खेला करती थी,उस आँगन का आकाश विदा

कहते है कोहिनूर का हीरा दुनिया का सबसे अनमोल हीरा होता है। और वह बहुत नसीब वालो को ही मिलता है ।इसी प्रकार से बेटिया भी ईश्वर के द्वारा धरती पर बनाया गया वो कोहिनूर का हीरा है जो बहुत नसीब वालो के  घर पैदा होती है ।अगर करम अच्छे  हो तो  बेटा पैदा होता है लेकिन अगर किस्मत अच्छी हो तो  बेटियां पैदा होती है। कहते है “हर बेटी के भाग्य में पिता होता है लेकिन हर पिता के भाग्य में बेटी नहीं होती “फिर भी क्यों आज बेटियों को अभिशाप ही मन जाता है। आज देश के सभी महत्वपूर्ण पदों पर बेटिया ही है वह दूसरी और कन्याभूर्ण हत्या का बढ़ता अकड़ा एक चिंता का विषय है ।

आइये इसे और विस्तार से समझते है-

अमेरिका में 1994 में एक सम्मेलन हुआ, जिसमें डॉ. निथनसन ने एक अल्ट्रासाउंड फिल्म (साइलेंट स्क्रीन) दिखाई. उसमें बताया गया कि 10-12 सप्ताह की कन्या की धड़कन जब 120 की गति में चलती है, तब बड़ी चुस्त होती है, लेकिन जैसे ही पहला औज़ार गर्भाशय की दीवार को छूता है तो बच्ची डर से कांपने लगती है और अपने आप में सिकुड़ने लगती है. औज़ार के स्पर्श करने से पहले ही उसे पता लग जाता है कि हमला होने वाला है. वह अपने बचाव के लिए प्रयत्न करती है. औज़ार का पहला हमला कमर और पैर पर होता है. गाजर-मूली की भांति उसे काट दिया जाता है. कन्या तड़पने लगती है. फिर जब उसकी खोपड़ी को तोड़ा जाता है तो एक मूक चीख के साथ उसका प्राणांत हो जाता है. यह दृश्य हृदय को दहला देता है. इस निर्मम कृत्य से ऐसा लगता है, मानों कलियुग की क्रूर हवा से मां के दिल में करुणा का दरिया सूख गया है

आज हम लोग चाँद पर तो पहुँच गए है फिर भी इस भयानक कुरीति से बाहर नहीं निकल पाए है। हम देवी की पूजा तो कर सकते है लेकिन अपने घर मे देवी का पैदा होना हमे बर्दाश्त नही होता जो कही न कही हमारी छोटी ओर घटिया सोच को दर्शाता है क्योकि अगर बेटी न हो तो वंश कैसे आगे बढेगा । ओर बेटो की शादी कहा से होगी।

तो आइए आज से संकल्प ले, न तो कभी भूर्ण हत्या करेगे ओर न कभी होने देगे । क्योकि किसी ने कहा है कि नजर बदलिए, नजारे अपने आप बदल जाएगे।

Credits: Rishabh Lens


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About Sameer Chaudhary 12 Articles
MBA in HR. I worked for 3 yrs in financial Industry and finally decided to follow my dream which is writing. My passion is writing, exploring the world and to get different experiences by meeting people. My philosophy about life is that " You are the only master of life. So you decide what you want to do don't compel other to decide." Life is to live.....