August 23, 2017

“मुम्बई ओर अंडरवर्ल्ड “

मुम्बई एक ऐसा शहर जहा हजारो लोग अपने सुनहरे भविष्य के सपनो के साथ कदम रखते है इसलिए मुम्बई को मायानगरी भी कहा जाता है ! कहते है मुम्बई का दिल इतना बड़ा है कि यहा रहने वाले हर इंसान को वह अपने दिल मे जगह देती है,परन्तु क्यू इतने बड़े दिल वाले शहर को समय समय पर किसी न किसी खूनी वारदात का गवाह बनना पड़ा ? क्यू देश मे सबसे ज्यादा घिनौनी वारदात मुम्बई मे ही हुई?इन सभी सवालो के जवाब जानने के लिए हमे इतिहास के उसी काले अध्याय को दोहराना होगा जहा से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला यह खूनी खेल शुरू हुआ।

भारत के पश्चिमी तट पर स्थित मुम्बई  (पूर्व नाम बम्बई), भारतीय  राज्य महाराष्ट्र की राजधानी भी है। इसकी अनुमानित जनसंख्या 3 करोड़ 29 लाख है जो देश का पहला  सर्वाधिक आबादी वाला शहर है।मुम्बई बन्दरगाह भारत का सर्वश्रेष्ठ सामुद्रिक बन्दरगाह है। यूरोप, अमेरिका, आदि पश्चिमी देशों से जलमार्ग या वायुमार्ग से आनेवाले जहाज यात्री एवं पर्यटक सर्वप्रथम मुम्बई ही आते हैं इसलिए मुम्बई को भारत का प्रवेशद्वार भी कहा जाता है। मुम्बई भारत का  वाणिज्यिक केन्द्र भी  है। जिसकी भारत के सकल घरेलू उत्पाद  में 5% की भागीदारी है। यह सम्पूर्ण भारत के औद्योगिक उत्पाद का 25%, नौवहन व्यापार का 40%, एवं भारतीय अर्थव्यवस्था के पूंजी लेनदेन का 70% भागीदार है। मुंबई विश्व के सर्वोच्च दस वाणिज्यिक केन्द्रों में से एक है।भारत के अधिकांश बैंक एवं सौदागरी कार्यालयों के प्रमुख कार्यालय एवं कई महत्वपूर्ण आर्थिक संस्थान जैसे भारतीय रिजर्व बैंक, बम्बई स्टॉक एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के मुख्यालय  तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियां मुम्बई में स्थित हैं। इसलिए इसे भारत की आर्थिक राजधानी भी कहते हैं।

नगर में भारत का हिन्दी चलचित्र उद्योग भी है, जो बॉलीवुड के नाम से प्रसिद्ध है। इतना सब अपने अन्दर समेटने के बावजूद भी क्यू मुम्बई आज अकेली है ? आज हमने अधिकांश जंगलो को शहरो के रूप मे तब्दील कर लिया है परन्तु हम मे से अधिकतर लोग अभी भी जानवर ही है,इसका जीता जागता उदाहरण है मुम्बई की सड़के जहा आए दिन गुनाहो की एक नई खूनी दास्तान लिखी जाती है !देश मे कितनी सरकारे आयी ओर कितनी गयी परन्तु कोई भी सरकार आज तक मुम्बई को इस अंडरवर्ल्ड ओर माफियाओ की कैद से नही छुड़ा सकी !

अंडरवर्ल्ड का इतिहास पांच या दस साल पुराना नही बल्कि आजादी के बाद से ही इसने मुम्बई मे अपने पांव जमाने शुरू कर दिए थे ! अंडरवर्ल्ड का जिक्र आते ही सबसे पहले  नाम जो जेहन मे आते  है वह है दाऊद इब्राहिम ओर छोटा राजन के , परन्तु इन सबसे पहले भी कोई था जिसने मुम्बई अंडरवर्ल्ड की जड़े जमाने मे अहम भूमिका निभाई थी। उसने मुंबई अंडरवर्ल्ड को एक नई पहचान दी और ग्लैमर को अंडरवर्ल्ड के साथ लाकर खड़ा कर दिया था. वो नाम था बाहुबली माफिया तस्कर हाजी मस्तान का. जो मुंबई का पहला अंडरवर्ल्ड डॉन भी  कहलाया ।

हाजी मस्तान मिर्जा का जन्म तमिलनाडु के कुड्डलोर में 1 मार्च 1926 को हुआ था. उसके पिता हैदर मिर्जा एक गरीब किसान थे. उनका परिवार आर्थिक रूप से काफी कमजोर था. कई बार घर में खाने के लिए भी पैसे नहीं होते थे. घर का गुजारा बड़ी मुश्किल से होता था. इसी परेशानी में हैदर नए काम के लिए शहर जाना चाहते थे. लेकिन घर की परेशानी की वजह से वो घर नहीं छोड़ पाते थे जब दो दिन तक घर मे खाना नही बना तो हैदर ने दूसरे शहर जाकर पैसा कमाने की सोची 1934 मे जब हाजी मस्तान का परिवार बम्बई आया तो उन्होने साइकिल की दुकान खोली ,आठ साल का वह मासूम लड़का अपनी साइकिल की दुकान पर बैठकर वहा से गुजरने वाली गाड़ियो को देखता था बस  वहीं से उसने उन गाड़ियों और बंगलों को अपना बनाने का सपना संजोया था.

“1944” यही वह साल था जब मस्तान ने जुर्म की दुनिया मे पहला कदम रखा था ! 1944 मे मस्तान की मुलाकात गालिब शेख नाम के शख्स से हुई  उसे एक तेजतर्रार लड़के की ज़रूरत थी. उसने मस्तान को बताया कि अगर वह डॉक पर कुली बन जाए तो वह अपने कपड़ों और थैले में कुछ खास सामान छिपाकर आसानी से बाहर ला सकता है. जिसके बदले उसे पैसा मिलेगा. इसके बाद मस्तान ने 1944 में डॉक में कुली के तौर पर काम करना शुरू कर दिया. वह मन लगाकर काम करने लगा था. इस दौरान वहां डॉक पर काम करने वालों से मस्तान ने दोस्ती करना भी शुरू कर दिया।दरअसल चालीस के दशक मे विदेशो से इलेक्ट्रॉनिक सामान हिन्दुस्तान लाने पर भारी टैक्स देना पड़ता था जो बात शायद मस्तान को समझ मे आ गयी ओर उसने विदेशी सामान की स्मगलिंग करनी शुरू दी ।

तस्कर विदेशों से सोने के बिस्किट और अन्य सामान लाकर मस्तान को देते थे और वह उसे अपने कपड़ों और थैले में छिपाकर डॉक से बाहर ले जाता था. कुली होने के नाते कोई उस पर शक भी नहीं करता था. इस काम की एवज में मस्तान को अच्छा पैसा मिलने लगा था. ड़ाॅक पर काम करते करते मस्तान की जिन्दगी बेहतर होने लगी थी अब वह कुली से एक तस्कर बन चुका था । 1950 का दशक मस्तान मिर्जा के लिए मिल का पत्थर साबित हुआ. 1956 में दमन और गुजरात का कुख्यात तस्कर सुकुर नारायण बखिया उसके संपर्क में आ गया. दोनों के बीच दोस्ती हो गई. दोनों साथ मिलकर काम करने लगे. उस वक्त सोने के बिस्किट, फिलिप्स के ट्रांजिस्टर और ब्रांडेड घड़ियों की बहुत मांग थी. मगर टैक्स की वजह से भारत में इस तरह का सामान लाना बहुत महंगा पड़ता था. लिहाजा दोनों ने मिलकर दुबई और एडेन इस सामान की तस्करी शुरू की. जिसमें दोनों को खासा मुनाफा हो रहा था. दोनों का काम बढ़ता गया और मस्तान की जिंदगी भी अब बदल चुकी थी.

मामूली सा कुली मस्तान अब बाहुबली माफिया मस्तान भाई बन चुका था. 1970 का दशक आते आते मस्तान मुबंई मे अपनी अलग पैठ बना चुका था अब  मुंबई अंडरवर्ल्ड की दुनिया में सिर्फ एक ही नाम था मस्तान भाई यानी हाजी मस्तान. अब समुद्र मे उसका राज चलने लगा था   मस्तान जैसा बनना चाहता था, वह उससे ज्यादा ही बन गया था. मुंबई अंडरवर्ल्ड के राजा कहे जाने वाले हाजी मस्तान मिर्जा का बॉलीवुड से बेहद लगाव था. मुंबई के पुराने लोग बताते हैं कि हाजी मस्तान बॉलीवुड अभिनेत्री मधुबाला का दिवाना था. वह उससे शादी करना चाहता था. मगर हालात के चलते ऐसा नहीं हो सका. फिर मधुबाला जैसी दिखने वाली फिल्म अभिनेत्री सोना मस्तान को भा गई और उसी के साथ मस्तान ने शादी की.

मस्तान ने सोना के लिए कई फिल्मों में पैसा लगाया. लेकिन उनकी फिल्में नहीं चल सकी. बताते हैं कि दिलीप कुमार, अमिताभ बच्चन, राज कपूर, धमेंद्र, फिरोज खान और संजीव कुमार जैसे बॉलीवुड सितारों से हाजी मस्तान की दोस्ती थी. कई बड़ी बॉलीवुड हस्तियां अक्सर उनके बंगले पर दिखाई देती थी. मुबंई में हाजी मस्तान मिर्जा का नाम इतना बड़ा बन चुका था कि पुलिस और कानून उसके लिए कोई मायने नहीं रखता था. 1974 में जब पुलिस ने पहली बार हाजी मस्तान को गिरफ्तार किया तो उसे एक वीआईपी की तरह तमाम सुविधाएं दी गई थी. उसे हवालात में न रखकर एक बंगले में नजरबंद रखा गया था. खाने के लिए बेहतरीन इंतजाम किए गए थे. उसकी खातिरदारी के लिए हर उस ज़रूरत का ख्याल रखा गया था, जिसकी मस्तान को चाह थी.

1974 ही वह साल जो मस्तान की जिन्दगी मे यू टर्न लेकर आया । देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी मस्तान की ख़बरें मिलती रहती थी. मस्तान के बढ़ते प्रभाव से इंदिरा भी परेशान थीं. उनके आदेश पर मस्तान मिर्जा को उस वक्त पुलिस ने गिरफ्तार करने की कोशिश की मगर वो पकड़ में नहीं आया. लेकिन आपातकाल लगने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया. और यह पहला मौका था जब हाजी मस्तान को बाकायदा जेल जाना पड़ा था. आपातकाल के दौरान जेल जाने  में मस्तान की मुलाकात जेपी से हुई. उनके संपर्क में आने के बाद मस्तान पर खासा प्रभाव पड़ा. जब 18 महीने जेल में रहने के बाद हाजी मस्तान बाहर आया तो उसके इरादे बदल चुके थे. उसने जुर्म की दुनिया को अलविदा कहने का मन बना लिया था.

आखिरकार, 1980 में हाजी मस्तान ने जरायम की दुनिया को अलविदा कहकर राजनीति का रुख कर लिया था वह कहा करता था कि मै “वह काम करता हू जिसकी इजाजत सरकार नही देती परन्तु वह काम हरगिज नही करता जिसकी इजाजत जमीर नही देता” हालांकि हाजी मस्तान मुंबई अंडरवर्ल्ड का सबसे ताकतवर डॉन था. लेकिन इस शक्तशाली डॉन ने अपनी पूरी जिंदगी में किसी की जान नहीं ली. किसी पर हमला नहीं किया. यहां तक कि एक भी गोली नहीं चलाई. बावजूद इसके हाजी मस्तान जुर्म की काली दुनिया में सबसे बड़ा नाम था. उस दौर में उसके नाम की तूती मुंबई ही नहीं बल्कि पूरे महाराष्ट्र में बोलती थी. हाजी मस्तान जिंदगीभर मुंबई में लोगों की मदद भी करता रहा ओर जब तक उसकी बादशाहत रही तब तक लोग सड़को पर महफूज रहे एक ओर बड़ा नाम जो अंडरवर्ल्ड की दुनिया मे सामने आया वह था दाऊद इब्राहिम का। दाऊद इब्राहिम कास्‍कर पुलिस कॉन्‍स्‍टेबल का बेटा था ओर गैंगवार को देखते हुए बड़ा हुआ था। पिता के नाम का फायदा उठाते हुए दाऊद ने छोटी-मोटी वसूली के रूप में अंडरवर्ल्‍ड की ओर कदम बढ़ाए थे।

जल्‍द ही वह करीम लाला की गैंग से जुड़ गया। लाला के बड़े बेटे की मौत के बाद दाऊद ने उसका धंधा संभाला और डी-कंपनी के नाम से अपनी नई गैंग बनाई। दाऊद ने मुंबई अंडरवर्ल्‍ड का नया नक्‍शा भी खींचा था। दाऊद की एक खासियत थी कि वह अपने दुश्‍मनों को कभी नहीं छोड़ता था और अनबन होने पर अपने करीबियो को भी माफ नही करता था उसके यहा गलती की सजा केवल मौत थी। उसने अंडरवर्ल्‍ड को मैच फिक्सिंग, बॉलीवुड, उगाही, स्‍मगलिंग तथा रियल एस्‍टेट की दुनिया में स्‍थापित किया। 1993 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार धमाके के बाद वह देश का सबसे बड़ा आतंकी तथा मोस्‍ट वांटेड अपराधी बन चुका था वही 1997 मे म्यूजिक किगं कहे जाने वाले गुलशन कुमार की हत्या ने बॉलीवुड ओर अंडरवर्ल्‍ड के नापाक रिश्तो को उजागर किया।

उसके बाद 26 नवंबर 2008 का वह आतंकी हमला जो एक बार फिर पूरी मानवता को शर्मसार कर गया, ओर धमाको की आवाज मे मुम्बई दफन होती चली गई  परन्तु इन सबका जिम्मेदार अकेले अंडरवर्ल्‍ड को ठहराना भी गलत है क्योकि पुलिस ओर सरकार इसमे बराबर की जिम्मेदार है अगर  पुलिस द्वारा कोई ठोस कदम उठा लिया जाता तो मुम्बई की हालत शायद इससे कही बेहतर होती। हाजी मस्तान ने  समुद्र पर राज किया लेकिन उसने कभी अपने काले कारनामो से शहर गंदा नही किया वही दाऊद ने अपना खूनी खेल मुम्बई की सड़को पर ही खेला  तभी आज  सड़को पर लोग  महफूज नही है ।हालांकि 1993 के मुकाबले अगर आज की बात की जाए तो  मुम्बई मे गैंगवार लगभग थम सा ही गया है ओर दाऊद इब्राहिम ओर उसके गुर्गे भी ऊपरी तौर पर शान्त ही है परन्तु आज चालीस साल बाद भी मुम्बई मे न रहते हुए दाऊद मुम्बई पर राज करता है !

यदि हम बालीवुड़ का इतिहास उठाकर देखे तो किसी न किसी तरीके से अंडरवर्ल्ड की काली कमाई  फिल्मो मे इस्तेमाल की गई ओर आज भी हो रही है, संजय दत्त , सलमान खान भरत शाह यह ऐसे बड़े नाम है जिनका कभी न कभी अंडरवर्ल्‍ड से रिश्ता रहा है ओर जिसके कारण इन्हे कई बार जेल की हवा भी खानी पड़ी । अभी 14 जुलाई 2017 को दाऊद की बहन पर बनी  फिल्म हसीना पारकर रिलीज होने जा रही है यहा एक सवाल जेहन मे आता है कि क्या बालीवुड़ मे ड़ायरेक्टरस् के पास समाज मे अच्छा संदेश देने वाली कहानियो का अकाल पड़ चुका है जो आज समाज मे एक ड़ान की बहन पर फिल्म बनाई जा रही है  हसीना पारकर कोई समाजसेविका तो थी नही जो उसकी फिल्म देखकर समाज मे एक अच्छा संदेश जाएगा हसीना पारकर पर हफ्ता वसूली, हत्या ओर अपहरण समेत अठ्ठासी केस दर्ज है परन्तु बालीवुड़ यह सब कहा सोचता है उसे तो बस अपनी बाक्स आफिस की कमाई बढाने से मतलब है,वही पुलिस भी अंडरवर्ल्‍ड को लेकर कितनी ही हवाई बाते करे परन्तु अंदरूनी तरीके से आज भी मुम्बई मे अंडरवर्ल्ड का बोलबाला है !यदि पुलिस को मुम्बई को महफूज करना है  तो माफियाओ को मुंबई से खत्म करना होगा वरना वह दिन दूर नही जब पूरा देश मुम्बई जैसे आतंकी हमलो से दहल उठेगा।

Picture Credit: You Tube
About Sameer Chaudhary 10 Articles
MBA in HR. I worked for 3 yrs in financial Industry and finally decided to follow my dream which is writing. My passion is writing, exploring the world and to get different experiences by meeting people. My philosophy about life is that " You are the only master of life. So you decide what you want to do don't compel other to decide." Life is to live.....