लालू युग का अंत

बिहार में एक बहुत मशहूर कहावत थी” जब तक रहेगा समोसे में आलू, तब तक रहेगा बिहार में  लालू।लेकिन समोसे में आलू तो है लेकिन बिहार से लालू प्रसाद यादव गायब हो गए है।हमेशा अपने अलग अंदाज के चलते सुर्खियों में रहने वाले लालू इस बार अलग करने के चक्कर में कुछ इतना ही अलग कर गए कि उन्हें साढे तीन साल के लिए सलाखों के पीछे जाना पड़ा।लेकिन कहते है वक़्त हमेशा एक सा नहीं रहता।उतार और चढ़ाव एक सिक्के के दो पहलू की तरह होते है। दुनिया में ये कहावत बहुत मशहूर है जो चढ़ा है वह गिरेगा जरूर। जो भी चीज़ इस दुनिया में आ गयी उसका अंत निश्चित है।भले ही  दिल्ली, बिहार, उत्तर प्रदेश में भले ही नए साल का आगाज़ बहुत सर्द रहा हो ओर पारा भी 4 डिग्री के आसपास पहुंच गया हो।लेकिन हिंदुस्तान की राजनीति में  बहुत ही दिग्गज नेता और कांग्रेस की सरकार में रेल मंत्री रहे लालू प्रसाद यादव की बहुत ही नाटकीय ढ़ंग से हुई गिरफ्तारी ने दिल्ली और बिहार के राजनीतिक गलियारों में इतने सर्द मौसम में भी गर्मी पैदा कर दी है।अब बिहार में इसे लालू युग का अंत कहा जाए तो ये अल्फ़ाज़ बेमानी नहीं होंगे।

भले ही आज लालू के दोनों बेटे राजनीति में अपने पिता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे थे लेकिन अचानक नीतीश का गठबंधन तोड़ना और लालू के जेल जाने के वाक्या ने उनकी मानो क़मर ही तोड़ कर रख दी।सुनने में तो ये भी आ रहा है कि कोर्ट का फैसला आने के बाद लालू की बड़ी बहन इस दुनिया में नहीं रही।अब वो कोर्ट का फैसला आने से गयी है या ठंड से ये तो उनकी बहन ही बता सकती थी।खैर, वो तो अब नहीं रही।तो इस प्रश्न को प्रश्न छोड़कर आगे बढ़ना ही उचित होगा।

वैसे राजनीतिक गलियारों में तो ये भी चर्चा है कि केंद्र सरकार उसी दिन से लालू के पीछे थी जिस दिन से बिहार में महागठबंधन हुआ था।इससे पहले भी लालू और शाहबुद्दीन के टेप कांड में लालू बाल बाल बचे थे। उसके बाद भाजपा ने महागठबंधन को तोड़ने के लिए शतरंज की ऐसी चाल चली जिसमे लालू को अपने वजीर नीतीश कुमार को खोना पड़ा।और इस चारा घोटाले की अगली चाल में लालू ऐसे फंसे की उन्हें भाजपा के साथ चल रहे इस शतरंज के खेल में सीधे शय और मात  मिली।लेकिन लालू भी राजनीति के पुराने धुरंधर है उन्होंने बिहार पर पंद्रह साल राज किया है वो भी इतनी जल्दी हार नहीं मानेंगे लेकिन फिलहाल राजनीति के पंडित इस सारे घटनाक्रम के पीछे मोदी की जीत और लालू की हार मान रहे है।

अब लालू की इससे बचने के लिए अगली चाल क्या होगी ये तो वक़्त ही बताएगा। लेकिन फिलहाल तो लालू का भविष्य पूरी तरह अंधकार में ही नजर आ रहा है।लालू के 12 बच्चे है।जिसमे से कुछ शादीशुदा है और कुछ अविवाहित है।लालू अपने पीछे करोड़ों की संपत्ति छोड़ गए है।अब देखना दिलचस्प होगा  कि उनके बच्चे इस दुख की घड़ी में अपनी मां राबड़ी के साथ खड़े होते है या समाजवादी पार्टी की तरह संपत्ति का बंटवारा करते है।लालू के दो बेटे राजनीति में है अब कहानी और मजेदार तब होगी जब लालू की खून पसीने से सींची गयी पार्टी राजद के दो टुकड़े न हो और इनके बेटे लालू के बाहर आने तक पार्टी का अस्तित्व बचा कर रखे।

हालांकि की देश की इन मशहूर हस्तियों के जेल जाना कोई नहीं बात नहीं है।इससे पहले भी संजय दत्त, सलमान खान जैसे बड़े नाम जेल की हवा खा चुके है।लेकिन संजय दत्त अपने अच्छे बर्ताव के चलते जेल से जल्दी रिहा हो गए।लेकिन जब वो पैरोल पर बाहर आये थे।तो उनक्स बाहर आना भी मीडिया ने विवादों में रह था क्योंकि जब वो बाहर आये तो जन्होने कोर्ट के सामने ये दलील दी थी कि उनकी पत्नी मान्यता दत्त की तबीयत खराब है जबकि उनके बाहर आने के बाद मान्यता को एक साथ कई पार्टियों में  देखा गया था।

लोगों ने तो यहां तक सवाल उठाया था कि आम आदमी और इन सेलेब्रटीज़ में ये भेदभाव क्यों?क्यों संजय दत्त पर इतनी मेहरबानी दिखाई गई।संजय दत्त एक ऐसे  अभिनेता रहे हैं जो अपनी सजा के दौरान सबसे ज्यादा बार पैरोल पर बाहर आए हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कोर्ट संजय दत्त की तरह लालू प्रसाद यादव भी इतनी मेहरबान होती है या नहीं ।और इसमे दूसरा पहलू ये भी है कि क्या लालू इसी तरह के बहाने बनाकर पैरोल पर बाहर आते हैं या अपनी सजा को पूरा करते हैं।साथ ही  ये भी देखना होगा कि कौन कौन लोग इस दुख की घड़ी में लालू के साथ खड़े होते है और कौन उनसे किनारा करता है।फिलहाल कांग्रेस ने तो अपनी ईमानदारी दिखाते हुए लालू की पार्टी से गठबंधन तोड़ने से मना कर दिया है।इसी के साथ लालू के जेल में बर्ताव भी इस सारे घटनाक्रम में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा।परंतु इस घटनाक्रम के बाद एक बात तो तय हो गयी है कि मोदी किसी जादूगर से कम नहीं है और वह मिनटों में सारा खेल बदलने की क्षमता रखते है।क्योंकि गुजरात से चलकर पूरे देश का प्रधानमंत्री बनना किसी करिश्मे से कम नहीं था।

Picture Credit – Wikipedia


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About Sameer Chaudhary

MBA in HR. I worked for 3 yrs in financial Industry and finally decided to follow my dream which is writing. My passion is writing, exploring the world and to get different experiences by meeting people. My philosophy about life is that " You are the only master of life. So you decide what you want to do don't compel other to decide." Life is to live..... More Posts