June 24, 2017

“सड़क पर अकेली महिला: मौका या जिम्मेदारी?”

हम आज अपने भारत देश की बात करते है तो हम कहते है कि हम आधुनिक भारत बनाने की ओर अग्रसर है परन्तु आज इक्कीसवी शताब्दी मे रहते हुए भी अपनी सोच को आधुनिक कर पाए जवाब होगा नही हो सकता है आप मे से कई लोगो का जवाब हा भी हो परन्तु वह सिर्फ एक अपवाद ही माना जाएगा,आज भी हम दहेज प्रथा ओर सती प्रथा जैसी कुरितियो से बाहर नही निकल पाए है।

आज भी रात को सुनसान सड़क पर चलती हुई लड़की हमे मिल जाए तो हम यह नही सोचेंगे कि हम किस प्रकार इसको सुरक्षित इसके घर पहुंचाए इसके विपरीत हम यह सोचते है अच्छा मौका है हालांकि आप मे से कुछ  इसके विपरीत बोले परन्तु वास्तविकता क्या है वह मुझसे बेहतर आप जानते है,जबकि सड़क पर चलती हुई अकेली लड़की मौका नही हम सबकी जिम्मेदारी होनी चाहिए।

यहा एक बात पर गौर करना जरूरी है कि देश की राजधानी दिल्ली जहा हम हर बार चुनावी मौसम आने पर हवाई वादे सुनते है परन्तु क्या आज भी देश की राजधानी दिल्ली मे महिलाऐ सुरक्षित है कहने को सारा केन्द्रीय नेतृत्व दिल्ली सरकार के मंत्री कई आला अधिकारी दिल्ली मे ही है परन्तु क्या हम दिल्ली को सुरक्षित बना पाए? नही।

अब समय आ गया है हम अपने दकियानूसी विचारो से बाहर निकले। कहने को हम आम आदमी परन्तु खाना  हम 16000 रू की थाली का खाते है परन्तु महिलाओ के लिए कोई कड़े कानून नही बना सकते क्योंकि अगर महिलाओ के लिए कानून बन गए तो कई आम आदमी से नेता बने नामी हस्तियो को नागवार गुजरेगा ओर हम एक महिला की सुरक्षा के लिए कई नामी चेहरो को कुर्बान नही कर सकते ?

अगर पसन्द आया तो जवाब जरूर दे कुछ गलत लिखा तो माफ करे।।

धन्यवाद
समीर चौधरी

Twitter: @sameerch123


Disclaimer 

About Guest Authors 285 Articles
News n Views is an online place for nationalists to share their opinions, information and content by way of Blogs, Videos, Statistics, or any other legal way that they feel comfortable.