October 20, 2017

कर्गिल विजय दिवस – #KargilVijayDiwas

Dimple Kaul

शारदा के प्रथम पुजारी

हैं आज हैरान

ऐसा कलयुग आया भाई

कंठ में आ गये प्राण

 

कंठ में आ गये प्राण जानकर

पद्‍मिनी का इतिहास

अज्ञानी वंशज ही जिसका

कर रहे हैं उपहास

 

उपहास देख भाग्य का

हृदय हो रहा विह्वल

राजा राम को वर्षा से

बचाता तंबू मलमल

 

मलमल जो बंगाल से था

आज है बांग्लादेशी

गौ जिसे माता है माना

कहलाए आज मवेशी

 

जो भी हो पर झुंड मवेशी

चलता है एकत्र

प्रकृति से सीख लेना

प्रथा नही विचित्र

 

है विचित्र केवल यह

करके बस हॅशटेग ट्रेंड

सोचते हैं हम देश भक्ति का

हो गया हॅपी एंड

 

एंड नही है भाई मेरे

यह तो है शुरुआत

एकजुट हो जाओ

ताकि बदल सकें हालात

 

हालात बदलो करो बंद

उन लोगों की दुकान

बाँटना चाहें हमको लेकर

जात धर्म का नाम

 

नाम राष्ट्र का ऊँचा हो

तो लेना होगा ठान

सर्वप्रथम भारतीय हम

जब तक तन में प्राण

 

प्राण देश पर किए न्योछावर

हम सबके लिए जिसने

उस सैनिक की स्मृति में

आओ आज शपथ लें

 

बहुत हो गयी राजनीति

अब राष्ट्रनीति हो बस

यह संकल्प ले चलो मनायें

आज कर्गिल दिवस

 

Poem was originally published at http://bit.ly/2ab23Od


About the Author

Dimple Kaul is an active denizen of the online world.She considers herself to be a citizen of the free world and believes in living and letting live. She does not have a preferred form or style of writing and uses poetry and/or prose based on what she wants to communicate.Some of her work is available on dimplehere.com. Her Twitter handle is @dimple_kaul  where her interest in the ‘right‘ kind of Politics and unabashed love for her nation is clearly visible. You can also connect with her at https://www.facebook.com/dimpleherelive 

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